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क्यों ये सिल्क अमीरों की पहली पसंद है? जानिए इसके बारे में सबकुछ

Anupam Dabral / Jagriti Priya | Dec 03, 2015, 13:09 IST
क्यों ये सिल्क अमीरों की पहली पसंद है? जानिए इसके बारे में सबकुछ
Vaishali Shadangule के आउटफिट में एक मॉडल
असम का नाम सुनते ही खूबसूरत प्राकृतिक नजारे, मनमोहक रंग, बिहू डांस के साथ-साथ मूगा सिल्क हमारी आंखों के सामने आ जाते हैं. हमारी भव्य संस्कृति में असम का काफी योगदान रहा है जिसमें से मूगा सिल्क एक है. अमीरों की पहली पसंद बन चुकी ये मूगा सिल्क आजकल काफी ट्रेंड में है. आखिर वो समय आ ही गया जब इस सिल्क ने लोगों के बीच अपनी पहचान बना ही ली.
इसमें कोई शक नहीं कि ये सदियों से मूगा सिल्क यूरोपिअन देशों के ट्रेड का एक अहम हिस्सा रही है. ये सिल्क भारतीय फैब्रिक्स, हैंडलूम्स और बुनकरों की विशेषताओं में से एक है.
क्या होती है मूगा सिल्क?
पीली सी दिखनी वाली मूगा सिल्क, उम्दा सिल्कों में से एक है. इस सिल्क को बनाने में जिस रेशम के कीड़े का इस्तेमाल होता है उसका वैज्ञानिक नाम Antheraea assamensis होता है. एक चीज़ जो मूगा सिल्क को इतनी कीमती बनाती है वो है इसकी शानदार चमक और मज़बूती. समय के साथ इस सिल्क की चमक और कीमत दोनों ही बढ़ती गई. इसकी और एक खासियत है कि इस पर किसी तरह की कढ़ाई आसानी से की जा सकती है. जैसा कि इसके ऊपर पीले रंग की खूबसूरत परत चढ़ी होती है इसलिए इसे किसी तरह के डाइंग की ज़रूरत नहीं पड़ती है. लेकिन अगर ज़रूरत पड़ी तो किसी डाई का इस्तेमाल करने में भी कोई हर्ज नहीं होता है.

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    कहां बनती है मूगासिल्क?
    मूगा सिल्क का इतिहास 1228-1800 के समय का है जब अहोम शासक का शासन हुआ करता था. अहोम, मूगा सिल्क के इस्तेमाल पर काफी ज़ोर देते थे और हर वो शख्स जो राज घराने से ताल्लुक रखता था उन्हें इस सिल्क से बने कपड़ों को इस्तेमाल करने की सलाह देते थे. सदियों तक इस सिल्क के रख-रखाव से लेकर इस्तेमाल तक का जिम्मा शाही घराने के लोगों को ही था और इसे 'राजगोरिया लूम्स' के नाम से जाना जाता था.
     
    मूगा सिल्क ज़्यादातर असम के पश्चिम इलाकों में मौजूद गारोह हिल्स में तैयार की जाती है. ऐसा माना जाता है कि हर किसान 1000 कॉकून्स पर 125 ग्राम सिल्क तैयार करता है. इस सिल्क के इस्तेमाल से तैयार एक साड़ी बनाने में 1000 ग्राम मूगा सिल्क का इस्तेमाल हो जाता है. इसे तैयार काफी मुश्किल टेक्नीक से तैयार किया जाता है इसलिए एक साड़ी तैयार होने में कम से कम दो महीने का समय लेती है. पारंपरिक रूप से मुगा सिल्क को असम का परंपरिक पहनावा ‘मेहेलगा-सादर’ को तैयार करने में इस्तेमाल किया जाता है लेकिन बदलते ट्रेंड की वजह से मुगा सिल्क का इस्तेमाल कर कई डिज़ाइनर्स मॉर्डन आउटफिट भी तैयार कर रहे हैं. 2007 में मूगा सिल्क को Geographical Indication (GI tag) भी मिल चुका है.
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    आज के ज़माने में मूगासिल्क?
    आज कई डिज़ाइनर्स इस सिल्क का इस्तेमाल कर कई खूबसूरत आउटफिट्स तैयार कर रहे हैं, जिनमें सबसे पहला नाम आता है मुंबई की डिज़ाइनर Vaishali Shadangule का. जब बात मूगा सिल्क के ज़रिए बेहतरीन कट्स और सिलुएट्स की आती है तो Vaishali का कोई मेल नहीं. इनके अलावा, Abraham & Thakore और  Payal Pratap भी ऐसे डिज़ाइनर्स हैं जो इस सिल्क के शानदार इस्तेमाल के लिए जाने जाते हैं और इंडियन फैब्रिक में इनका योगदान काबिले तारीफ है.
     
     
     
     

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