ज़िंदगी में सबकुछ पाने के बाद, मैंने फेस लिफ्ट क्यों करवाया

ज़िंदगी में सबकुछ पाने के बाद, मैंने फेस लिफ्ट क्यों करवाया

मुझे इस बात का खुलासा करना है कि मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी इस फेमिनिस्ट सोच को अपनाने की कोशिश की है कि आपको अपने शरीर के साथ कंफर्टेबल होना चाहिए. मैं कभी भी बहुत पतली, बहुत सुंदर या शारीरिक तौर पर कभी भी बहुत कुछ नहीं रही हूं... बल्कि, जब मैं बड़ी हो रही थी तो मैंने अपनी सारा ध्यान अपने दिमाग और व्यक्तित्व के विकास पर लगाया.
 
ये काफी अजीब है कि एक औरत जो अपनी किताबों से प्यार करती है, रोज़ पागलों की तरह अपना वज़न नहीं लेती है, जल्द ही डाएट्स से बोर हो जाती है और कभी-कभी मेकप लगाना भूल जाती है, कभी नॉन-सर्जिकल फेस लिफ्ट करवाएगी.
 
मैंने ऐसा क्यों किया?
 
मुझे ज़रूरत थी. अपने आप को स्थापित करने के बाद (किसी तरह प्रोफेशनली), एक बच्चे को बड़ा करने के बाद, घर चलाने के बाद और पृथ्वी को बचाने के लिए कुछ छोटा-मोटा काम करने के बाद, मुझे लगा कि अब मुझे अपने शरीर पर ध्यान करने की ज़रूरत है. ये झूठ होगा अगर मैं ये कहूं कि इसका मेरे 40 की होने से कोई लेना-देना नहीं है. हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं लेन-देन जिसका एक ज़रूरी हिस्सा है और औरतों का सारा लेन-देन उनके लुक्स पर टिका होता है. फेमिनिस्म पर छिड़ी बड़ी बहस के बावजूद, जब बात आती है रोमैन्स और समाज द्वारा आपनाए जाने की तो औरतों को अभी भी उनके लुक्स पर ही जज किया जाता है. वहीं आदमियों को दूसरी चीज़ों पर जज किया जाता है – चीज़ें जो उनकी होती हैं या जो वो कमाते हैं. हम इसी तरह बनाए गए हैं. हम इसी तरह लोगों को जज करते हैं.
 
इसिलिए मैंने नॉन-सर्जिकल फेस लिफ्ट को चुना! अचानक 41 की उम्र में मुझे काउन्टर्ड गाल, नाक और एक ठोस जॉलाइन चाहिए थी. मुझे अपनी Facebook प्रोफाइल पिक्चर में खूबसूरत लगना चाहती थी, मैं शैलो और अल्पजीवी होना चाहती थी. शायद मैं उम्र के इस पड़ाव पर अंदर की जवां छवि को छोड़ना नहीं चाहती थी. शायद मैं ये समझ गई थी की लुक्स आपको ऐसे पावर और आत्मविश्वास देते हैं जिसके बारे में हम सोच भी नहीं सकते हैं.
 
ऐसा नहीं है कि ये प्रक्रिया मेरी ज़िंदगी बदल रही थी. ये महंगा है, बहुत समय लेता है और इरिटेटिंग भी, पर प्लास्टिक सर्जरी जितना महंगा भी नहीं. क्या इसने मेरी ज़िंदगी बदली है? हां, पर ये बदलाव काफी मामूली से हैं. लोग मुझसे कहते हैं कि मैं कितनी अच्छी दिखती हूं और जितनी ज़्यादा वो मेरी तारीफ करते हैं मुझे उतना ही अच्छा लगता है. क्या मैंने ये किसी को खुश करने के लिए किया है? हां, मैंने ये खुद को खुश करने के लिए किया है. क्या मुझे इससे 5 साल बाद कुछ फर्क पड़ेगा? पता नहीं, पर अभी, ज़िंदगी के इस पड़ाव पर मुझे बेहद अच्छा लग रहा है.
क्या मैं आपको ये करने की सलाह दूंगी? हां, ये तब करें जब आपने अपनी ज़िंदगी में कुछ अहम और ठोस हासिल कर लिया हो. सिर्फ बाहर से अच्छा दिखना और अंदर से खोखला होना बेहद बोरिगं है – और खतरनाक भी. पर अगर मेरी ही तरह, आप भी एक स्ट्रॉन्ग, इंटेलिजेंट औरत हैं जो कभी-कभी तारीफ की चाहत रखने वाली फेमिनिन साइड के आगे घुटने टेक देती है, तो बिल्कुल कीजिए. ये बस आपका एक बेहतर वर्ज़न है!
 
Sonali Sokhal एक कम्यूनिकेशन कंसल्टेंट हैं. वो एक फुल टाइम मां हैं. पार्ट टाइम में वो सपने देखती हैं जिनके शौक में Instagramming, दौड़ना और पढ़ना शामिल है.
 

 

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