इसलिए मैं कभी नहीं छोड़ूंगा पगड़ी पहनना!

इसलिए मैं कभी नहीं छोड़ूंगा पगड़ी पहनना!

आजकल पगड़ी के बारे में बहुत कुछ सुनने को मिल रहा है. रेसिज़्म पर शुरु हुई बहस के बाद, सिखों के पगड़ी पहनने पर जोक्स बनने लगे. ये हमारे गौरव, विरासत, कल्चर और ट्रेडिशन का एक खूबसूरत प्रतीक रहा है. लेकिन जब से सिखों का पगड़ी पहनना बहस का मुद्दा बना है, हर किसी की इसपर अपनी ही एक राय बन गई है. ईमानदारी से कहूं, तो कई राय बिल्कुल भी अच्छी नहीं हैं.
 
पंजाब का युवा सिख और दूसरी जगहों के यंग पंजाबी भी अब पगड़ी पहनने से बचने लगे हैं, लेकिन इसके लिए पूरी तरह उन्हें दोष नहीं दिया जा सकता. टीवी और सिनेमा के ग्लैमर ने पगड़ी को सिरे से नकारा है. वेस्टर्न देशों में तो पगड़ी को शक भरी नज़रों से देखा जाता है, शायद यही कारण है कि वेस्ट कंट्रीज़ जाने वाले युवा सिख इसके बदले कैप या दूसरे हेडगियर्स पहनना पसंद करने लगे हैं.
 
सच कहूं, तो मैं उन्हें जज नहीं कर रहा हूं. हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां हमें अपनी सोच रखने की पूरी आजादी है, हम अपनी पसंद से कपड़े पहन सकते हैं, अपनी आदतों के लिए हम पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है. मेरे पगड़ी पहनने के भी यही कुछ कारण हैं.
 

 

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